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बिहार में सीएम पद की राजनीति: शिवानंद तिवारी ने जताई सम्राट चौधरी को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में पहचान

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पटना: बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। इस चर्चा को और हवा देते हुए वरिष्ठ राजनीतिज्ञ शिवानंद तिवारी ने सोशल मीडिया पर अपनी राय रखी और पुरानी राजनीतिक पृष्ठभूमियों के संदर्भ में संभावित उत्तराधिकारी की पहचान की। उन्होंने अपनी पोस्ट में नीतीश कुमार के ‘लव-कुश’ राजनीतिक समीकरण और पिछले अनुभवों को जोड़ते हुए बताया कि राज्य में सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जा सकती है।
शिवानंद तिवारी ने कहा कि इस समय बिहार में अगला मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी का ही होगा और पार्टी में नेतृत्व का चुनाव लगभग तय प्रतीत हो रहा है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि भाजपा ने पूर्व के दो उपमुख्यमंत्रियों की जगह एक ही उपमुख्यमंत्री, सम्राट चौधरी, को नियुक्त किया है। इसके साथ ही सम्राट चौधरी का केंद्रीय गृहमंत्री बनना भी उनके पक्ष में जाता है। शिवानंद तिवारी ने संकेत दिए कि यह सब नीतीश कुमार की रणनीति के अनुरूप हो रहा है।
शिवानंद ने अतीत का जिक्र करते हुए बताया कि जब लालू यादव के साथ जुड़ना संभव नहीं रहा, तब समता पार्टी का गठन हुआ। 1994 में गांधी मैदान में हुई घोषणा के दौरान समता पार्टी ने ‘लव-कुश’ यानी कुर्मी और कुशवाहा तथा अति पिछड़े समुदाय के राजनीतिक गठजोड़ पर जोर दिया। इस रैली में कांग्रेस छोड़कर कई अन्य नेता, जैसे शकुनि चौधरी, भी शामिल हुए और उन्होंने लालू यादव पर तीखे हमले किए। इस रैली ने कुशवाहा समाज को समता पार्टी की ओर आकर्षित किया और लव-कुश समीकरण को स्थापित किया, जो आज तक नीतीश कुमार के राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
अब जब यह चर्चा है कि नीतीश कुमार राज्यसभा जा सकते हैं, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि उनका राजनीतिक उत्तराधिकारी कौन होगा। वर्तमान में नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा पर हैं और उनके कई मंत्रिमंडलीय सहयोगी भी उनके साथ हैं। इस यात्रा के दौरान उनके व्यवहार और संकेतों पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। पूर्णिया में एक कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर उन्हें आगे बढ़ाया, जो संभावित उत्तराधिकारी के रूप में उनके पक्ष में मजबूत राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी बनाया जाता है, तो यह केवल सत्ता का हस्तांतरण नहीं होगा, बल्कि लव-कुश समीकरण के जरिए पिछले वर्षों में बनाए गए सामाजिक गठबंधन को बनाए रखने का प्रयास भी होगा। कुशवाहा समाज के प्रति यह कदम नीतीश कुमार की कृतज्ञता और उनके राजनीतिक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है। अब परीक्षा सम्राट चौधरी की राजनीतिक क्षमता और जन समर्थन को लेकर होगी कि वह इस चुनौती को कितनी मजबूती से संभालते हैं।
मुख्य संदेश: बिहार में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस सवाल पर चर्चा जारी है। वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने अपनी गणना के आधार पर सम्राट चौधरी को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में उभारा है। यह कदम नीतीश कुमार के राजनीतिक समीकरण और लव-कुश गठबंधन को आगे बढ़ाने की रणनीति के अनुरूप माना जा रहा है।

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